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जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश

ग्राम भारती, परतोष, धम्मौर अमेठी

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हमारा लक्ष्य

इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली का विकास करना है, जिसके द्वारा ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण हो सके जो हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो, शारीरिक, मानसिक, प्राणिक, एवं आध्यात्मिक, दृष्टि से पूर्ण विकसित हो, जो जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सकें और अपने बान्धवों को सामाजिक कुरीतियों से मुक्त कराकर राष्ट्र जीवन को समरस, सुसम्पन्न एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए समर्पित हो |

विद्यालय का विशेषताएं

बालक से सर्वांगीण विकास हेतु विद्यालय की विशेषताएं :-
भारतीय संस्कृति पर आधारित बालक के सर्वांगीण विकास की शिक्षा|
मनोवैज्ञानिक पंचपदी शिक्षण प्रणाली ( अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार) का प्रयोग |
बाल-केन्द्रित एवं क्रिया-आधारित अधिगम पद्धति |
प्रखर देश भक्ति के संस्कारों से युक्त उत्तम मानवीय

विविध क्रियाकलाप

प्रत्येक शिशु अनेक प्रतिभाओं का धनी है| गुणों एवं प्रतिभाओं के विकास के लिए आवश्यक है उसे उचित अवसर एवं वातावरण प्रदान करना | शिशु में अनेक गुण विद्यमान होते हैं परंतु योग्य वातावरण मिलने पर ही वे विकसित होते हैं| विद्यालय का वातावरण संस्कारक्षम रहे, इसके लिए शिक्षण के साथ-साथ निम्नांकित क्रियाकलाप भी शिशु मंदिर योजना के अंग है – स्वच्छता सज्जा, खेलकूद, व्यायाम योग, प्रार्थना सभा

प्रदेश निरीक्षक की कलम से

विद्यालय में भैया /बहिनों के समग्र विकास की योजना को ध्यान में रखते हुए शारीरिक, मानसिक, व्यावसायिक, नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा की व्यवस्था की गयी है | जिसे पंचमुखी शिक्षा के नाम से जानते है | विद्यालय के विद्वान् और समर्पित आचार्य द्वारा पंचपदी शिक्षण पद्धति अपनाते हैं I यथा स्मार्ट क्लास, कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर, डिजिटल लाइब्रेरी आदि जिससे भैया /बहिनों को सभी प्रकार से विषय स्पष्ट हो सके | विद्यालय में आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, कम्प्यूटर प्रयोगशालाएं और संगीत कक्ष और योग कक्ष की व्यवस्था की गयी है | खेल कौशल के विकास हेतु विद्यालय, अंतर्विद्यालय, प्रदेश स्तर व् अखिल भारतीय स्तर पर भैया /बहिनों की सहभागिता कराने का प्रयत्न किया जाता है | ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक भारत के भ्रमण हेतु देश – दर्शन यात्राओ का आयोजन कराया जाता है |

अपना स्पष्ट उद्देश्य है की हम ऐसे बालको का निर्माण कर सके जो आधुनिकतम ज्ञान में पारंगत हो तथा जीवन में आने वाली हर प्रकार की चुनौतियों का सामना कर सकें साथ ही समाज के अन्य उपेक्षित और पिछड़े बंधुओ के प्रति उनके मन में राष्ट्र के प्रति भक्ति तथा प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूक हों |

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हमारे बारे में

विद्यालय का इतिहास

“बालक की अन्तर्निहित शक्तियों को अभिव्यक्ति एवं विकास का अवसर प्रदान करना ही शिक्षा है ” स्वामी विवेकानंद के इस कथन के अनुसार शिक्षा केवल औपचारिक रूप से कुछ विषयों के शिक्षण तक ही सीमित नहीं रह जाती उसका उद्देश्य विस्तृत एवं व्यापक है इसमें बालक के सर्वांगीण विकास (शारीरिक, मानसिक, बौध्दिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक) एवं सामाजिक विकास की कल्पना में औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तिगत क्षमताओं, प्रतिभाओं तथा सद्गुणों के विकास का वातावरण एवं अवसर प्रदान करना निहित है |

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विद्यालय का विशेषताएं

बालक से सर्वांगीण विकास हेतु विद्यालय की विशेषताएं :-
भारतीय संस्कृति पर आधारित बालक के सर्वांगीण विकास की शिक्षा|
मनोवैज्ञानिक पंचपदी शिक्षण प्रणाली ( अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार) का प्रयोग |
बाल-केन्द्रित एवं क्रिया-आधारित अधिगम पद्धति |
प्रखर देश भक्ति के संस्कारों से युक्त उत्तम मानवीय

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हमारा लक्ष्य

इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली का विकास करना है, जिसके द्वारा ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण हो सके जो हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो, शारीरिक, मानसिक, प्राणिक, एवं आध्यात्मिक, दृष्टि से पूर्ण विकसित हो, जो जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सकें और अपने बान्धवों को सामाजिक कुरीतियों से मुक्त कराकर राष्ट्र जीवन को समरस, सुसम्पन्न एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए समर्पित हो |

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शैक्षणिक

प्रवेश सम्बन्धी नियम

कक्षाएं शिशु वाटिका (Pre-Primary): प्रथम कक्षा से पूर्व दो वर्ष की शिशु वाटिका कक्षाएं चलती हैं। जिसमे बच्चों को खेल खेल में ही अनौपचारिक एवं व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। शिशु वाटिका में प्रवेश की आयु 3 वर्ष होनी आवश्यक है। तत्पश्चात प्रत्येक वर्ष शिशु के विकास के आधार पर आगामी कक्षा में प्रोन्नत किया…

पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धति

उच्च शैक्षिक स्तर के साथ-साथ सदगुणों का विकास भी हो यह बात वातावरण, क्रियाकलाप तथा शिक्षण व्यवस्था पर बहुत कुछ निर्भर करती है परन्तु पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों का भी अपना विशेष महत्व है इस बात को ध्यान में रखकर व विद्याभारती का पाठ्यक्रम एवं अतिरिक्त विषयों का अपना पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों की व्यवस्था…

परीक्षा कार्यक्रम

केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना ही उद्देश्य ना मानते हुए शिशु के ज्ञानात्मक, बोधात्मक, भावात्मक एवं क्रियात्मक पक्ष के मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है | यह कार्य आचार्यों द्वारा सतत होता रहता है | द्विमासिक परीक्षण (test) अर्धवार्षिक तथा वार्षिक परीक्षा के आधार पर कक्षोन्नति होती है | पंचम कक्षा में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने…

विविध क्रियाकलाप

प्रत्येक शिशु अनेक प्रतिभाओं का धनी है| गुणों एवं प्रतिभाओं के विकास के लिए आवश्यक है उसे उचित अवसर एवं वातावरण प्रदान करना | शिशु में अनेक गुण विद्यमान होते हैं परंतु योग्य वातावरण मिलने पर ही वे विकसित होते हैं| विद्यालय का वातावरण संस्कारक्षम रहे, इसके लिए शिक्षण के साथ-साथ निम्नांकित क्रियाकलाप भी शिशु…

शुल्क

विद्यालय का समय

शिशु मंदिर का सत्र :- सत्र 01 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है | 21 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश रहता है | शिशु मंदिर का समय :- ग्रीष्मकालीन – (कक्षा प्रथम से पंचम तक) प्रातः 8:00 से 1:30 बजे तक (कक्षा अरुण(Nur.),उदय(L.K.G.), प्रभात(U.K.G.) तक) प्रातः 8:30 से 1:00 बजे तक शीतकालीन

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शुल्क सम्बन्धी नियम

निर्धारित वार्षिक एवं मासिक शुल्क की सूचना अलग पत्रक द्वारा दी जाती है | शुल्क सम्बन्धी अन्य सूचनाएं इस प्रकार से है :-

1. शुल्क सम्पूर्ण सत्र अर्थात् अप्रैल से मार्च तक का मासिक जमा होता है |
2. सम्पूर्ण शुल्क अग्रिम भी जमा कराया जा सकता है |

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शुल्क जमा करने की तिथि

1. शुल्क प्रत्येक मास की दिनांक 5 से 10 तक लगातार तथा दिनांक 15 व 20 को जमा होगा, इसके बाद दिनांक 25 व मासान्त तिथि को विलंब शुल्क के साथ ही शुल्क जमा होगा |

2. मास के अंतिम कार्य दिवस तक शुल्क जमा ना होने पर नियमानुसार नाम पृथक हो जाएगा |

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हमारे मार्गदर्शक

डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार

परम पूज्य सरसंघचालक जी

माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर

द्वितीय सरसंघचालक

लालबहादुर शास्त्री

जय जवान-जय किसान

स्वामी विवेकानन्द

उठो जागो और लक्ष्य को प्राप्त करो

प्रशंसा पत्र

रोशनी शर्मा

“हमें इस स्कूल से प्यार है। हमने हमारे दोनों बच्चों को यहाँ नामांकित किया है| यहाँ अद्भुत शिक्षकों और कर्मचारियों से मिलने वाले प्यार और देखभाल और ध्यान से वो बहुत ही उत्साहित रहते है| “

तारा साहू

इस स्कूल के बारे में बहुत बड़ी बातें नहीं कह सकती | मेरा पुत्र प्रांरभ से ही यहाँ नामांकित है तथा मेरे दूसरे पुत्र का दाखिला भी मैंने यही करवाया है | यहाँ शिक्षकों द्वारा मिलने वाले प्यार और ध्यान से वो बहुत खुश रहते है |

सुमित पटेल

“मैं सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल की अत्यधिक सिफारिश करता हूं! ये स्कूल अन्य स्कूल से अलग है जहा बच्चो को शिष्ट आचरण के साथ सभी प्रकार के कार्यकलापों के लिए प्रोत्साहित किया जाता है|”

फोटो गैलरी

प्रांतीय खेलकूद समारोह 2026

प्रांतीय खेलकूद समारोह 2026

स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस

गणतंत्र दिवस कार्यक्रम

गणतंत्र दिवस कार्यक्रम

विविध सांस्कृतिक गतिविधियाँ 

विविध सांस्कृतिक गतिविधियाँ 

कक्षा में विद्यार्थी

कक्षा में विद्यार्थी

सूचना – कार्यक्रम

28 Sep

प्रांतीय खेलकूद समारोह 2026

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17 Oct

विश्व पुस्तक दिवस 2026

जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश , ग्राम भारती, परतोष, धम्मौर अमेठी में विश्व पुस्तक दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पुस्तकों के महत्व को समझा और पठन-पाठन के प्रति रुचि दिखाई। विभिन्न गतिविधियों जैसे पुस्तक प्रदर्शनी, कहानी वाचन और विचार प्रस्तुति का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने बच्चों को नियमित अध्ययन की प्रेरणा दी। यह दिवस ज्ञानवर्धन और संस्कार निर्माण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

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17 Oct

विद्यालय में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित

आचार्य आदर्श जी एवं आचार्या बहिन ज्योति जी द्वारा अतिथियों का पटका पहनाकर आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया। सम्पूर्ण कार्यक्रम सेवा, अनुशासन एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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Serach

सूचना-कार्यक्रम

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  • विश्व पुस्तक दिवस 2026
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हमारा लक्ष्य

इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली का विकास करना है, जिसके द्वारा ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण हो सके जो हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो, शारीरिक, मानसिक, प्राणिक, एवं आध्यात्मिक, दृष्टि से पूर्ण विकसित हो, जो जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सकें और और उसका राष्ट्र जीवन को समरस, सुसम्पन्न एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए समर्पित हो |

विद्यालय का विशेषताएं

  1. भारतीय संस्कृति पर आधारित बालक के सर्वांगीण विकास की शिक्षा |
  2. मनोवैज्ञानिक पंचपदी शिक्षण प्रणाली ( अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार) का प्रयोग |
  3. बाल-केन्द्रित एवं क्रिया-आधारित अधिगम पद्धति |
  4. प्रखर देश भक्ति के संस्कारों से युक्त उत्तम मानवीय एवं चारित्रिक गुणों के विकास पर बल |

विविध क्रियाकलाप

प्रत्येक शिशु अनेक प्रतिभाओं का धनी है| गुणों एवं प्रतिभाओं के विकास के लिए आवश्यक है उसे उचित अवसर एवं वातावरण प्रदान करना | इसके लिए शिक्षण के साथ-साथ निम्नांकित क्रियाकलाप भी शिशु मंदिर योजना के अंग है – स्वच्छता सज्जा, खेलकूद, व्यायाम योग, प्रार्थना सभा, सामूहिक भोजन, सामूहिक योगाभ्यास तथा राष्ट्रगीत के साथ विसर्जन आदि का दैनिक आयोजन किया जाता है|

संपर्क सूत्र

जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश,

ग्राम भारती, परतोष, धम्मौर अमेठी

Phone : +91-8318330551

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